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The Kashmir File क्यों देखनी जरुरी है

 कला, संगीत, फिल्मों और साहित्य के अलग अलग genre होते हैं....ऐसे ही एक genre है 'मानव त्रासदी'......जिसे 'Genocide' या 'Crimes Againsy Humanity' के नाम से भी जाना जाता है।


ये फिल्में बड़ी दुखदाई होती हैं, इसमे मानव के साथ हुए अत्याचारों को दिखाया जाता है....कई बार ये अत्याचार किसी खास धर्म, जाति या एक Ethinic ग्रुप के विरोध में होते हैं.....

अगर सर्वकालिक महान फ़िल्म का नाम लिया जाए, तो अधिकतर लोग 'Schindler's List' का नाम लेंगे.....जो नाज़ी द्वारा jews पर किये खौफनाक अत्याचारों पर बनी थी.....सत्य कहानी थी, बनी भी अच्छे से थी, इसलिए आज भी लोग देखते हैं.....और जब देखते हैं तो कांप भी जाते हैं।

ऐसी ही कुछ और भी फिल्में हैं, जैसे Sophie's Choice.... जिसमे भी नाज़ियों के अत्याचारों को दिखाया था.....बेहतरीन फ़िल्म है, अगर देखेंगे तो शायद दिल बैठ जाये आपका।

ऐसे ही 'The Boy in the stripped Pajamas', 'Come and See', 'Judgement at Nuremberg', 'First They Killed My Father', 'Shoah', 'Sometimes in April', ' Auschwitz : Inside the Nazi state' जैसी अनेकों फिल्में है जो इस genre में आती हैं......और इनका picturization इतना बेहतरीन है कि आप उन घटनाओं को होते हुए मेहसूस करते हैं......आपका Jews, अफ्रीकी या कोरियन लोगो से कोई लेना देना ना भी हो, तब भी आप इन फिल्मों को देख कर उन लोगो से connect कर पाते हैं, उनके भयावह इतिहास और उसकी वजह से उनके वर्तमान और भविष्य में पड़ने वाले प्रभावों को समझ पाते हैं।

भारत मे भी इस तरह की कुछ फिल्में बनी हैं, लेकिन उनका स्तर वैसा नही रहा। विभाजन पर ही कई फिल्में बनी हैं जैसे गरम हवा, ट्रैन to पाकिस्तान, पिंजर,1947 Earth, और Midnight's Children आदि.

इसके अलावा धार्मिक हिंसा, जैसे गुजरात दंगों पर भी कई फिल्में बनी हैं...जैसे 'परज़ानिया', 'फ़िराक़', 'चांद बुझ गया', 'काई पो छे' आदि.....ये फिल्में सराही भी गयी, अवार्ड भी मिले.....हालांकि इनमें से किसी भी फ़िल्म में गुजरात दंगों का trigger point 'गोधरा कांड' नही दिखाया....खैर, क्यों नही दिखाया इसका जवाब आगे मिलेगा पोस्ट में।

अब एक नई फिल्म आ रही है, 'Kashmir Files'.....फ़िल्म है कश्मीर में 80-90 के दशक में हुए Ethinic Cleansing के बारे में....जिसके बारे में आज तक ज्यादा लोग नही जानते। बस ये बताया जाता है कि 5 लाख कश्मीरी हिन्दू अपना घर छोड़ कर जाने पर मजबूर कर दिए गए.....लेकिन क्यों? ये कभी भी पूरी तरह नही बताया जाता।

किसी भी देश मे इतना बड़ा migration हो जनता का, तो ये कोई आम बात नही....जरूर उसके कारण होते हैं....और हमारे secular-liberal देश मे ऐसे कारणो पर बोलना स्वीकार नही किया जाता......लेकिन अगर आप धर्म को swap कर दें तो बात बन जाती है।

पंडित टीकालाल टपलू को क्यों मारा गया, इसमे लोगो की रुचि कम होती है.....लेकिन एहसान जाफरी की मृत्यु पर UN तक हिला देते हैं.....ये bias क्यों??

कश्मीर फाइल्स में एक घिनौना सच दिखाया गया है.....हर वो घटना दिखाई है, जिसे आपसे छुपा कर रखा गया है....फ़िल्म के ट्रेलर में Actor जोर से एक नारा देता है...'रालिव गालिव या चालिव'.....कभी पता किया है इस नारे का मतलब क्या है?? गूगल कीजियेगा

एक और नारा लगता था, Asi gachi Pakistan, bata ros ta batanev san....
इसका मतलब बता देता हूं....'हमे पाकिस्तान चाहिए, जहां कश्मीरी हिन्दू औरतें ही होंगी, उनके मर्दों का कोई स्थान नही होगा'

ऐसी ही कई घटनाएं हैं....हिन्दू अपने मृत लोगो का अन्तिम संस्कार नही कर पाते थे....ऐसे किसी काम के लिए बाकायदा अखबार में Advertisement देना पड़ता था....आतंकवादियों से इजाजत लेनी पड़ती थी....कि हमे अंतिम क्रिया करने दो।

इस फ़िल्म में ऐसे कई सच दिखाए हैं, जो शायद आपको झिंझोड़ दें, सोचने पर मजबूर कर दें कि ऐसी भयानक घटना हमारे देश मे हुई है, और इसके बारे में कोई बात भी नही करता।

फ़िराक़, परज़ानिया को सैंकड़ो अवार्ड मिल जाते हैं, लेकिन कश्मीर फाइल्स की release से पहले ही उंस पर Ban लगाने के लिए कोर्ट चले जाते हैं लोग.....NDTV जैसे चैनल बिना फ़िल्म देखे ही उसे प्रोपगंडा फ़िल्म घोषित कर देते हैं.....कपिल शर्मा फ़िल्म के crew को अपने शो पर बुलाता ही नही......शायद इन्हें अपने Secular सर्टिफिकेट खोने का डर लगता हो।

लेकिन याद रखियेगा, यही तथाकथित सेक्यूलर लिबरल जमात के लोग कश्मीर को भारत से अलग करने की बात करते हैं, भारतीय सेना को गालियां देते हैं, लेकिन 80-90 के दशक के आतंकवाद और Ethinic Cleansing पर चुप रहते हैं।

फ़िल्म को ये लोग प्रोपगंडा बोल सकते हैं, लेकिन फ़िल्म में कई असली तस्वीरें और reference भी दिए हैं, जो इस सेक्युलर-लिबरल गैंग की पोल खोल देती है....कई दृश्य आपको विचलित भी कर सकते हैं.....उन्हें देखते समय सोचिएगा जरूर की कश्मीरी हिन्दुओ पर क्या गुजरी होगी........जानिए कि वो क्या कारण रहे होंगे, जो कश्मीर के समृद्ध और बड़े घरों में रहने वाले कश्मीरी हिन्दू, जम्मू और देश के अन्य इलाकों में बने छोटे, बदबूदार transit camp में रहने को मजबूर हुए....अपने ही देश मे रिफ्यूजी बनने को मजबूर हुए।

कुछ लोग कह रहे हैं कि एक फ़िल्म बना कर क्या उखाड़ लिया.....भई आपको यही कहूंगा, कि किसी भी समस्या के समाधान के लिए उनके rootcause जानने जरूरी होते हैं....आज की जनरेशन X या Y कितना जानते हैं कश्मीर की समस्या को?? कितने लोगों को कश्मीरी हिन्दुओ के पलायन की सच्चाई पता है?? अच्छा ही है कि एक फ़िल्म आ रही है, जो जागरूकता फैलाएगी, लोगों को सोचने पर मजबूर करेगी.....

फ़िल्म बहुत बड़ा और स्ट्रांग माध्यम होती है......एक Schindler's List देख कर आपकी आंखों में आंसू आ जाते हैं, हिटलर के प्रति आपमे नफरत की भावना जाग जाती है......ये होता है फ़िल्म का असर।

फिलहाल तो यही कहूंगा....कि अगर आपको कश्मीर का इसिहास नही पता तो ये फ़िल्म जरूर देखिए.....अगर आपको इतिहास पता है तो भविष्य के लिए जरूर ही देखनी चाहिये।


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