राष्ट्रवादिता की अनोखी मिसाल है भजन सम्राट श्री प्रकाश जी माली.....

नमस्कार मित्रो !
अभी इन दिनो राजस्थान के भजन गायकों को लेकर एक बहस चल रही हे । और पूछा जा रहा की राष्ट्रवादी गायक कौन हे , तो सबसे पहले बता दूँ हर कोई कलाकर तो क्या हर एक इंसान जिसने हिंदुस्थान मे जन्म लिया हे वो राष्ट्रवादी ही हे ।
दूसरी बात उपाधि की हे , तो जो व्यक्ति जिस विषय मे काम करता हे तो उसको उसी की उपाधि या नाम से जाना जाता हे । जेसे जो राजनीति से सम्बधित राजनीतिक , समाजशास्त्र से सम्बंधित समाजशास्त्री ,।
खेर बाकी विषयो को मै अलग रखकर सिर्फ कलाकारो की ही बात करूँगा ।
तो गायकों मे लोकगायकी मे बावजी रामनिवास जी राव , पेमाराम जी , मोहन जी झाला जेसे बहुत सारे महापुरुष हुये हे । रामनिवास जी राव को राजस्थानी भजन सम्राट कहे तो भी कोई अतिशयोक्ति नही हे ।
और राष्ट्रवाद के बिंदु पर कहे तो #श्रीमान_प्रकाश_जी_माली का नाम सर्वोपरि हे , क्योँकि सबसे ज्यादा राष्ट्र चेतना और राष्ट्र जागरण के लिये जितना काम किया हे , उतना राजस्थान मे किसी भी कलाकर ने नही किया हे ।
कुछ लोगो को कहना हे की राष्ट्रवाद की उपाधि उनके प्रशंसक दे रहे हे , तो उनको ज्यादा ना कहते हुये इतना ही कहेँगेँ की पुरुस्कार या सम्मान मिले वो सभी राष्ट्रवाद के विषय पर ही मिले हे ।
उन्होने अपने जीवन काल मे राष्ट्र जागरण के उदेश्य से
मायड थारौ वो पूत कठे
स्वामी भक्त पन्नाधाय
विवेकानद जी
सरहद
फौजी भाईयो के लिये
मा भारती
हरवक्त तात्कालिक विषय के बारे मे
पाकिस्तान और चीन जेसे दुश्मन देशो के प्रति हिन्दुस्थानके लोगो मे जरूरत पढ़ने पर साहस और देशभक्ति की भावना को जगाने का काम किया हे ।
हर भजन सँध्या को देश भक्ति गीतो से गुँजायमान करके भजनसँध्या को नई दिशा दी हे ।
मुख्य बात देश के युवाओं को मुख्य धारा मे लाने का श्रेय भी जाता हे ।
इसी कड़ी मे राष्ट्र जागरण के उदेश्य से वो देश के प्रधानमँत्री नरेन्द्र मोदी जी के सामने महाराणा प्रताब जयँती पर सूरत मे 50000 लोगो के बीच अपनी प्रस्तुति दे चुके हे ।
और राष्टवाद की उपाधि राजस्थान के लोगो के द्वारा दी हुई हे। किसी एक या दो लोगो की नही ।
वन्दे मातरम


जयहिंद

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